अशोक कुमार: प्रकृति के साथ संतुलित पर्यटन
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रूरल एंटरप्रेन्योरशिप भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ती पहल है, जो समुदायों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह उन लोगों को सहयोग देती है जो अपनी कौशल और उपलब्ध संसाधनों से ऐसे उद्यम शुरू करते हैं, जो समाज और स्थानीय आजीविका को बेहतर बनाते हैं।
विविध अनुभवों से बना रास्ता
अशोक कुमार की यात्रा साधारण शुरुआत से ग्रामीण उद्यमिता में सफलता तक पहुँचने की कहानी है, जो उनके धैर्य, समर्पण और प्रकृति के प्रति गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।
अशोक का जन्म और पालन-पोषण हिमालय की तलहटी में हुआ, इसलिए पहाड़ों और प्रकृति से उनका गहरा लगाव है। वे उत्तराखंड के नैनीताल जिले के शांत क्षेत्र तल्ला रामगढ़ में रहते हैं। उन्होंने डिप्लोमा और स्नातक तक की शिक्षा पूरी की है। अपने उद्यम की शुरुआत से पहले उन्होंने 3 वर्ष ऑटोमोटिव क्षेत्र में और 2 वर्ष एक NGO में कार्य अनुभव प्राप्त किया।
चुनौतियों के बीच पर्यटन को आगे बढ़ाना
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तीन वर्ष काम करने के बाद COVID-19 के दौरान अशोक की नौकरी प्रभावित हुई, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी अस्थिर हो गई। इस समय उन्होंने दो वर्षों तक एक NGO के साथ काम किया और 50 से अधिक गाँवों में खेल प्रशिक्षण दिया। लगभग 3000 विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिताएँ आयोजित कर उन्होंने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोजने और उन्हें दिल्ली में होने वाले आयोजनों तक पहुँचाने में मदद की। पहाड़ों के प्रति अपने लगाव और खोजी स्वभाव के कारण उन्होंने पर्यटन-आधारित व्यवसाय शुरू करने का अवसर पहचाना।
एनजीओ में काम करते हुए उन्हें पर्यटकों को पहाड़ों की अनदेखी खूबसूरती दिखाने में रुचि जगी।सीनियर स्टाफ के सुझाव पर उन्होंने विदेशी पर्यटकों के एक समूह को नैनीताल घुमाया और उन्हें स्थानीय संस्कृति, होमस्टे व खान-पान से परिचित कराया।यही अनुभव उनके सपनों की नींव बना और उन्हें इस क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को लोगों तक पहुँचाने की दिशा मिली।

समुदाय-केंद्रित सोच और पर्यावरण संरक्षण
अशोक स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने में विश्वास रखते हैं। वे टैक्सी ड्राइवरों, गाइडों और उन परिवारों के साथ सहयोग करते हैं जो पर्यटकों को होमस्टे सुविधा प्रदान करते हैं।
इस सहयोग से सभी को अपने पर्यटन व्यवसाय के माध्यम से आय अर्जित करने का अवसर मिलता है। सामूहिक प्रयासों से समुदाय को अपने ही क्षेत्र में सतत् और सम्मानजनक आजीविका का अवसर प्राप्त होता है।
अशोक सतत और जिम्मेदार यात्रा पर जोर देते हैं।वे विज़िटर्स को ट्रेकिंग के दौरान प्रकृति की रक्षा करने के तरीके बताते हैं, प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिए प्रेरित करते हैं और पहाड़ों में बिना नुकसान पहुँचाए घूमने की सही आदतें सिखाते हैं।उनका उद्देश्य पहाड़ियों को सभी के लिए साफ़ और सुरक्षित बनाए रखना है।
शुरुआत में अशोक के पास सीमित पूंजी थी और मार्केटिंग का अनुभव कम होने के कारण अपने व्यवसाय को लोगों तक पहुँचाना चुनौतीपूर्ण रहा। साथ ही, इस क्षेत्र में पहले से स्थापित प्रतिस्पर्धियों का मजबूत ग्राहक आधार था। नए होने के कारण पर्यटकों का भरोसा जीतने के लिए उसे अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।

मार्गशाला: अवसरों की ओर कदम
अशोक को मार्गशाला फाउंडेशन के बारे में सबसे पहले भगता भारत नामक NGO के माध्यम से जानकारी मिली, जिससे वे पहले से जुड़े हुए थे। यद्यपि कई संगठन ग्रामीण व्यवसायों को सहयोग प्रदान करते हैं, लेकिन स्वरोज़गार फेलोशिप की गहराई, स्पष्ट दृष्टिकोण और सुविचारित कार्यप्रणाली ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।
इस कार्यक्रम की सबसे प्रमुख विशेषता है — एक सस्टेनेबल व्यवसाय के निर्माण में आवश्यक छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना। फेलोशिप ने प्रतिभागियों को अपने विचारों को परिष्कृत करने, उद्देश्य को स्पष्ट रूप देने और योजनाओं को संरचित एवं व्यावहारिक कार्ययोजना में परिवर्तित करने में सहायता की।
ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से मार्गशाला युवाओं के लिए ऐसे मंच तैयार करती है, जहाँ उन्हें उद्यमिता से परिचित कराया जाता है, वास्तविक सफलता की कहानियों से प्रेरित किया जाता है, और अपने भविष्य के लिए नई संभावनाओं पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

स्वरोज़गार फ़ेलोशिप ने अशोक को अपना बिज़नेस औपचारिक रूप से शुरू करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।बिज़नेस का नाम तय करने से लेकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तक, टीम ने हर चरण पर निरंतर मार्गदर्शन और मेंटरशिप प्रदान की।
इस दौरान उन्होंने वित्तीय समझ विकसित की, व्यावहारिक मार्केटिंग रणनीतियाँ सीखीं और अपने काम को टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास हासिल किया।इस अनुभव ने न केवल उनकी तकनीकी समझ मज़बूत की, बल्कि व्यवसाय का नेतृत्व करने में उनका भरोसा भी बढ़ाया।
फेलोशिप के मार्केटिंग चरण के दौरान अशोक को अपना पहला Google रिव्यू मिला — एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण पड़ाव, जिसने उनके काम के प्रति उनका विश्वास और मजबूत किया।इसी दौरान उन्हें GIVC (Genuine Interest & Value Creation) के सिद्धांत से परिचित कराया गया, जिसने उन्हें क्लाइंट्स से ईमानदारी से संवाद करने और तात्कालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक मूल्य निर्माण पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।
इस सिद्धांत को अपनाने से उनके ग्राहकों से जुड़ने का तरीका बदल गया। अतिरिक्त प्रयास कर वास्तविक सहयोग देने से रिश्ते मजबूत हुए और रेफरल व बढ़ते नेटवर्क के माध्यम से स्वाभाविक वृद्धि हुई।अशोक के अनुसार, फेलोशिप से मिली सीख ने उन्हें केवल उद्यमी ही नहीं, बल्कि अधिक संवेदनशील और सक्षम व्यक्ति भी बनाया है।

तकनीक का उपयोग और आगे की योजना
अशोक ने अपनी एक वेबसाइट शुरू की है, जिससे लोग आसानी से उनकी सेवाएँ खोज और बुक कर सकते हैं। वे सरकारी पर्यटन वेबसाइट पर भी सूचीबद्ध हैं, इसलिए वहाँ से भी उनसे संपर्क किया जा सकता है।
वे पहाड़ों में ट्रेकिंग, मंदिर दर्शन और अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी यात्राओं का आयोजन करते हैं। फिलहाल वे काम स्वयं संभाल रहे हैं, लेकिन भविष्य में टीम बनाने की योजना है।
अगले पाँच वर्षों में वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर आय को चार गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं।
अशोक की कहानी दिखाती है कि दृढ़ संकल्प, प्रकृति संरक्षण और उद्यमिता को साथ लेकर ग्रामीण भारत में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि सपनों का पीछा करते हुए पर्यावरण की रक्षा भी संभव है।
लेखक: भास्कर कौशल



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