top of page
खोज करे

कम चले रास्तों पर सफ़र: उत्तराखंड के एक जुझारू उद्यमी की कहानी

  • 28 मार्च
  • 3 मिनट पठन

पिथौरागढ़ के शांत माहौल में रहने वाली प्रिया उद्यमिता के क्षेत्र में अपना अलग रास्ता बना रही हैं। साधारण परिवार से आने वाली प्रिया के पिता दिल्ली में नौकरी करते हैं, माँ गृहिणी हैं और भाई सिविल इंजीनियर है। प्रिया को हमेशा से आत्मनिर्भर और कुछ नया करने का शौक था। इसलिए उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया—यह सिर्फ एक फैसला नहीं, बल्कि उनका जुनून भी है।


2017 में BA करते समय, प्रिया ने अपने कॉलेज के सामने एक छोटी-सी दुकान देखी, जहाँ मैक्रैम के सुंदर सामान बिकते थे। इससे उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा मिली।

अपने खर्च पूरे करने के लिए उन्होंने मैक्रैम सीखा और झूले, तोरण व घर सजाने की चीज़ें बनाना शुरू किया। हर महीने ₹800 कमाते हुए, उन्होंने इस कला में महारत हासिल की और बाज़ार की मांग को समझना भी शुरू किया।


मैक्रैम से बना तोरण
मैक्रैम से बना तोरण


मैक्रैम से बनी गणपति जी की मूर्ति
मैक्रैम से बनी गणपति जी की मूर्ति

शून्य से व्यवसाय खड़ा करना


अपनी नई सीखी हुई कला के साथ, उसने WhatsApp का इस्तेमाल किया और अपने गाँव व आस-पास के करीब 150 लोगों का एक ग्रुप बनाया।यही उसका पहला बाजार बना, जहाँ वह अपने उत्पादों का प्रचार और बिक्री करने लगी।साथ ही, वह उस दुकान के ऑर्डर भी पूरे करती रही, जहाँ से उसने यह कला सीखी थी।


उनकी नई सोच यहीं नहीं रुकी। उन्होंने ‘पिरुल’ (चीड़ की पत्तियों) से पर्यावरण के अनुकूल राखियाँ और अन्य उत्पाद बनाना शुरू किया, जिससे उनके व्यवसाय को नई दिशा मिली।

साल 2020 के लॉकडाउन में चुनौतियाँ आईं, लेकिन उन्होंने उसमें भी अवसर देखा। ‘मीशो’ ऐप उस समय लोकप्रिय हो रहा था, पर गाँवों में डिलीवरी नहीं होती थी। उन्होंने WhatsApp ग्रुप के जरिए लोगों की जरूरत के अनुसार ऑर्डर लेना शुरू किया, सामान पिथौरागढ़ में मंगवाया और फिर स्थानीय टैक्सी से गाँवों तक भिजवाया। इस काम से उन्हें कमीशन के रूप में आय होने लगी।


पिरुल के पेड़ से बनी राखियाँ
पिरुल के पेड़ से बनी राखियाँ

समुदाय को सशक्त बनाना और चुनौतियों पर विजय पाना


प्रिया का सफ़र ‘मार्गशाला’ से शुरू हुआ, जहाँ उन्हें व्यापार से जुड़ी ज़रूरी जानकारी और नए लोगों से जुड़ने का मौका मिला। Facebook Live के ज़रिए जुड़ने के बाद, उन्हें आद्या सिंह और जसमीत सिंह जैसे मेंटर्स मिले, जिन्होंने उनके बिज़नेस को बेहतर बनाने और उनकी ताक़त पहचानने में मदद की।


चुनौतियाँ तब आईं जब डिलीवरी एजेंट भी वही उत्पाद बेचने लगे और सीधी प्रतिस्पर्धा बढ़ गई। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपना मैक्रैम व्यवसाय जारी रखा। इंस्टाग्राम और फेसबुक के माध्यम से उन्होंने अपनी पहुँच बढ़ाई और नए ग्राहक जोड़े।


SHG महिलाओं के साथ सहयोग और पोर्टफोलियो का विस्तार


अपने गाँव की स्वयं-सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के साथ काम करने का मौका पहचानते हुए, उन्होंने उनके उत्पादों की मार्केटिंग शुरू की। ये महिलाएँ ‘आइपन’ कला और ‘चूरा’ पेड़ों से साबुन बनाने में माहिर थीं, और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें अपने उत्पादों को बेचने का नया मौका मिला।

आगे बढ़ते हुए, उन्होंने इन महिलाओं को फूलों और पत्तियों से ऑर्गेनिक रंगोली के रंग बनाना भी सिखाया। इस पहल से उनके उत्पाद और बेहतर हुए, साथ ही पारंपरिक कला को बचाने और बढ़ावा देने में भी मदद मिली।


प्रिया ने उत्तराखंड के पारंपरिक अनाज और विशेष उत्पादों को बेचने का एक व्यवसाय स्थापित किया है, जिसमें भांग दाना और रागी जैसी चीज़ें शामिल हैं।


फूलों और पत्तियों से बनी ऑर्गेनिक रंगोली
फूलों और पत्तियों से बनी ऑर्गेनिक रंगोली

ऐपन कला
ऐपन कला

शौक, आत्मनिर्भरता और भविष्य की योजनाएँ


प्रिया को हस्तशिल्प और कला का शौक है, जो उनके व्यवसायिक विचारों को नई दिशा देता है। वह अपना पूरा काम खुद संभालती हैं—बनाने से लेकर डिलीवरी तक।


भविष्य में प्रिया अपने उत्पादों की रेंज बढ़ाकर उसमें उत्तराखंड के और स्थानीय उत्पाद शामिल करना चाहती हैं। उनका उद्देश्य अपनी संस्कृति और विरासत को ज्यादा लोगों तक पहुँचाना है। साथ ही, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वे अपने काम का विस्तार कर स्थानीय स्वयं-सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के साथ और अधिक सहयोग करना चाहती हैं।


मैक्रैम सीखने से लेकर ऑनलाइन बिज़नेस संभालने तक, प्रिया की कहानी मेहनत, सीखने और आगे बढ़ने की मिसाल है।

यह सफ़र सिर्फ उनकी अपनी तरक्की का नहीं, बल्कि पूरे समुदाय को सशक्त बनाने का है। अपने काम के ज़रिए वह उत्तराखंड की हस्तकलाओं को दुनिया तक पहुँचा रही हैं।

अब ऑर्गेनिक रंगोली रंगों को जोड़कर, वह अपने बिज़नेस को और भी आगे बढ़ा रही हैं।


प्रणाली घोडेराव द्वारा लिखित

 
 
 

टिप्पणियां


होम 
हमारे बारे में 
कार्यक्रम 
संसाधन
ब्लॉग
अभी अप्लाई करें
फॉलो करें 

मार्गशाला फाउंडेशन,

प्लॉट 2ए, पहली मंजिल, खसरा 294, केहर सिंह एस्टेट, सैदुलजाब, लेन नंबर 2, नई दिल्ली - 110030

bottom of page