सपनों से हकीकत तक: आनंदमय हिमालय
- 28 मार्च
- 3 मिनट पठन
'India and Bharat Together' की 'मार्गशाला' की शुरुआत इस सोच के साथ हुई कि ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसर बनाए जाएँ।
गांवों और छोटे शहरों के युवाओं को अपने करियर और आजीविका के विकल्प समझने के लिए सही मार्गदर्शन और अनुभव (exposure) की ज़रूरत होती है।
ग्रामीण युवाओं की कहानियाँ बहुत प्रेरणादायक होती हैं, लेकिन अक्सर वे शहरी चकाचौंध या संघर्षों में दब जाती हैं।
‘मार्गशाला’ इन युवाओं की सफलता, उम्मीदों और सपनों की कहानियों को सामने लाने का काम करती है।

मार्गशाला के पहले बैच के उत्साही प्रतिभागियों में से एक रुद्रांश पाल की अपनी खास कहानी है। पिथौरागढ़ के रहने वाले रुद्रांश को हमेशा से पता था कि उत्तराखंड में पर्यटन के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं। उन्हें घूमना-फिरना बहुत पसंद है और वे इसकी खूबसूरती को अच्छी तरह समझते हैं।
वे लंबे समय से पर्यटन से जुड़ा अपना काम शुरू करना चाहते थे और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते थे। लेकिन सिर्फ रुचि और सपने ही काफी नहीं थे। उन्हें पैसे, सहयोग और सबसे जरूरी सही मार्गदर्शन की जरूरत थी, ताकि वे अपने विचारों को हकीकत में बदल सकें।
कोरोनावायरस महामारी ने उत्तराखंड ही नहीं, पूरी दुनिया के पर्यटन उद्योग को बहुत नुकसान पहुँचाया। इसलिए रुद्रान्श को लगा कि यह नया टूरिज्म काम शुरू करने का सही समय नहीं है।
लेकिन घर की स्थिति ठीक नहीं थी, और उसे भी वही दबाव महसूस हो रहा था जो अक्सर गांव के युवाओं को एक उम्र के बाद होता है।
पहले उसने कॉलेज जाने का सोचा, लेकिन पढ़ाई में मन नहीं लगा। फिर उसने पर्यटन क्षेत्र में काम करने का फैसला किया।
इसी दौरान उसे “हरेला सोसाइटी” के बारे में पता चला। वहाँ के संस्थापक मनु दफ़ाली से अचानक मुलाकात ने उसे अपना खुद का टूरिज्म वेंचर शुरू करने के लिए और प्रेरित किया।
हरेला सोसाइटी एक ऐसा संगठन है जो पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के साथ काम करने पर खास ध्यान देता है।
मनु दा के माध्यम से ही रुद्रान्श को ‘मार्गशाला’ के बारे में पता चला। वह बताते हैं, “मैं उनके साथ वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था, लेकिन तभी लॉकडाउन लग गया।”
लॉकडाउन के दौरान रुद्रान्श ने मार्गशाला के सेशन जॉइन करने शुरू किए। वह कहते हैं, “उस समय ज्यादा कुछ करने को नहीं था, लेकिन मार्गशाला ने मुझे सहारा दिया और मेरे सपनों पर ध्यान बनाए रखने में मदद की।”
मार्गशाला खत्म होने और लॉकडाउन हटने के बाद, रुद्रांश ने अपना खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। उसने एक होमस्टे और अपना ऑफिस रजिस्टर कराया। जैसे-जैसे राज्य में टूरिज़्म फिर से शुरू हो रहा है, उसे उम्मीद है कि उसका काम आगे बढ़ेगा।
रुद्रांश ने अपने दोस्त के साथ मिलकर ‘ब्लिसफुल हिमालय’ नाम से एक टूरिस्ट एजेंसी शुरू की। उनका उद्देश्य ग्रामीण हिमालय के उन इलाकों में इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देना है, जहाँ अभी तक ज्यादा विकास नहीं हुआ है।
उसे विश्वास है कि अगर सही योजना के साथ काम किया जाए, तो यह वेंचर काफी सफल हो सकता है।

रुद्रांश और उनके दोस्त के साथ अब दो कर्मचारी काम कर रहे हैं।वे इस बात से खुश हैं कि उनकी ‘ब्लिसफुल हिमालय’ वेबसाइट हाल ही में लॉन्च हुई है।उन्हें उम्मीद है कि वे आगे और रोज़गार के अवसर पैदा करेंगे, कर्मचारियों को अच्छा वेतन देंगे और उत्तराखंड के बढ़ते इको-टूरिज़्म का हिस्सा बनेंगे।
अगर रुद्रांश की कहानी आपको उत्तराखंड में रहते हुए एक उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करती है, तो आज ही Margshala से जुड़ें!
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