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सुनीता आर्य: पिथौरागढ़ में प्रतिभा और समुदाय को आगे बढ़ाने की पहल

  • 17 फ़र॰
  • 1 मिनट पठन

पिथौरागढ़ की प्राकृतिक सुंदरता के बीच, सुनीता आर्या साहस, दृढ़ता और नवाचार की एक प्रेरक उदाहरण हैं।उनकी यात्रा—जिसमें व्यक्तिगत चुनौतियाँ और पेशेवर उपलब्धियाँ शामिल हैं—उनके मजबूत संकल्प और सामुदायिक विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


सुनीता का जीवन कई जुड़े हुए कार्यों से बना है — बैग-सिलाई व्यवसाय, कौशल प्रशिक्षण केंद्र और कृषि।मार्गशाला फाउंडेशन और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से जुड़ना उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ। यहीं उन्होंने कौशल प्रशिक्षण के प्रति अपना जुनून पहचाना, जिसने उन्हें स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने और सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया।

बैग-सिलाई से एक कुशल प्रशिक्षक और सम्मानित सामुदायिक व्यक्तित्व बनने तक उनकी यात्रा ग्रामीण उद्यमिता की शक्ति को दर्शाती है। शुरुआत में संदेह जरूर था, लेकिन उनके निरंतर प्रयासों ने धीरे-धीरे समाज का विश्वास और सम्मान दिलाया। परिवार का सहयोग भी समय के साथ बढ़ता गया।


उनके सिलाई, पशुपालन और खेती केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम ने स्थायी आय के अवसर बनाए हैं और पारंपरिक कला को पुनर्जीवित किया है, जिससे पिथौरागढ़ के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है।


उनका घर पौधों की देखभाल का स्थान होने के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट का केंद्र भी है, जो प्रकृति और मानव क्षमता—दोनों की वृद्धि के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।


मार्गशाला फाउंडेशन उन्हें अपने व्यवसाय की रणनीति बेहतर बनाने और विस्तार करने के लिए आवश्यक कौशल व ज्ञान प्रदान कर रहा है। यह सहयोग पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने और स्किल-ट्रेनिंग आधारित उनके वेंचर को मजबूत करने में सहायक रहा है।

 
 
 

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