हिमाचली हथकरघा को पुनर्जीवित करना: एक उद्यमी ने बुनकरों के लिए आजीविका कैसे जुटाई
- 28 मार्च
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हिमाचल प्रदेश की हाथ से बनी ऊनी शॉलें, जिन पर सुंदर डिज़ाइन होते हैं, पूरे देश में बहुत प्रसिद्ध हैं। इसी तरह वहाँ की टोपियाँ और स्कार्फ़ भी काफी पसंद किए जाते हैं।लेकिन इनकी लोकप्रियता के बावजूद, इन्हें बनाने वाले बुनकरों के लिए अपना जीवन चलाना आज भी कठिन होता जा रहा है।
हालांकि हाथ से बने हिमाचली ऊनी उत्पादों की मांग आज भी है, लेकिन बाज़ार में मशीन से बने कपड़े ज़्यादा बिक रहे हैं। पर्यटक असली हाथ से बुने कपड़े खरीदना चाहते हैं, पर अक्सर उन्हें मशीन वाले कपड़े ही हाथ का बताकर बेच दिए जाते हैं। इस कारण वे महंगे दाम चुका देते हैं। इससे न पर्यटकों को सही चीज़ मिलती है, और न ही असली बुनकरों को फायदा होता है।
हिमाचल के हथकरघा बुनकर जब अपना बाज़ार और आमदनी खोने लगे, तब किरण ठाकुर को ‘हिमालयनक्राफ्ट’ शुरू करने की प्रेरणा मिली।
हिमालयनक्राफ्ट एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जो हिमाचल और आसपास के राज्यों के बुनकरों को सीधे जोड़ता है। इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी।
आज इसमें 200 से ज़्यादा बुनकर, 30+ बुनकर समितियाँ और 50 स्वयं-सहायता समूह जुड़े हैं। यह स्टार्ट-अप अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने उत्पाद बेच रहा है।

ठाकुर ने अपने करियर की शुरुआत नई दिल्ली में एक टूरिज़्म प्रोफेशनल के रूप में की और बाद में वे बिज़नेस टूर कंसल्टेंट बन गए। अपने अनुभव से उन्हें खुद का स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा मिली।
वे कुल्लू लौटे और वहाँ रिसर्च की। उन्हें पता चला कि पावरलूम के उत्पादों को हथकरघा बताकर बेचा जा रहा है, जबकि असली बुनकरों को नुकसान हो रहा है।
उन्होंने अपने दोस्तों से बात की, और जगत ठाकुर ने उनका साथ दिया। दोनों ने मिलकर Amazon पर पहली कुल्लू शॉल बेचकर शुरुआत की।
आज उनकी अपनी वेबसाइट है, जहाँ वे शॉल, स्टोल, मोज़े, मफ़लर और जैकेट जैसे कई हथकरघा उत्पाद बेचते हैं। वे बुनकरों को सही आय दिलाने में मदद कर रहे हैं।





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