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संभावनाओं को पहचानना: ग्रामीण इलाकों की युवतियां किस तरह पहाड़ी अर्थव्यवस्था को नया रूप दे रही हैं
ग्रामीण महिलाओं में उद्यम शुरू करने की क्षमता हमेशा से रही है। सही संसाधन और सहयोग मिलने पर वे अपने सपनों को साकार कर सकती हैं और आगे बढ़ सकती हैं। पीढ़ियों से उत्तराखंड की पहाड़ी अर्थव्यवस्था में महिलाओं की अहम भूमिका रही है। खेती, खाद्य उत्पादन, बुनाई, पारंपरिक कला और घर संभालने जैसे कामों में उनका बड़ा योगदान है। फिर भी, उनके कई कामों के लिए उन्हें पैसे नहीं मिलते और उनके योगदान को अक्सर आर्थिक काम के रूप में पहचान नहीं मिलती। इन समुदायों की युवतियां पारंपरिक कौशल और ज्ञान
26 अक्टू॰


सबसे नज़दीकी मोटर-योग्य सड़क से 10 किलोमीटर दूर बसे एक गाँव में अपना उद्यम खड़ा करने के लिए किन चुनौतियों, प्रयासों और अवसरों से गुज़रना पड़ता है?
प्रदीप के लिए, उद्यम की शुरुआत अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों और ज्ञान को पहचानने से हुई। उन्होंने अपने समुदाय की पारंपरिक कला, स्थानीय कारीगरों के अनुभव और पीढ़ियों से चली आ रही कुशलताओं को अपनी ताकत बनाया। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि बाज़ार से भौगोलिक दूरी, अवसरों की कमी का संकेत नहीं है। सही सोच और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से दूरस्थ गाँवों में भी उद्यम के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं। प्रदीप उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में भारत-नेपाल सीमा के पास बसे दूरस्थ गाँव मेटली
13 अक्टू॰


सरकारी परीक्षा की तैयारी से डिजिटल नेतृत्व तक: नैनीताल के गोकुल मेर की उद्यमिता यात्रा
उत्तराखंड के कई युवा स्नातकों के लिए भविष्य की राह अक्सर सीमित विकल्पों तक सिमट जाती है—या तो वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी करना, या बेहतर अवसरों की तलाश में पहाड़ों से बाहर जाकर अनिश्चित परिस्थितियों में अपना भविष्य बनाना। नैनीताल के गोकुल मेर भी अपने करियर को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर थे। BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शुरुआत में सरकारी नौकरी की तैयारी की। हालांकि, उनके भीतर कुछ अलग करने और अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा भी थी। इसी दौरान, अपने भाई स
16 अग॰
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