top of page
All Posts


सरकारी परीक्षा की तैयारी से डिजिटल नेतृत्व तक: नैनीताल के गोकुल मेर की उद्यमिता यात्रा
उत्तराखंड के कई युवा स्नातकों के लिए भविष्य की राह अक्सर सीमित विकल्पों तक सिमट जाती है—या तो वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी करना, या बेहतर अवसरों की तलाश में पहाड़ों से बाहर जाकर अनिश्चित परिस्थितियों में अपना भविष्य बनाना। नैनीताल के गोकुल मेर भी अपने करियर को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर थे। BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शुरुआत में सरकारी नौकरी की तैयारी की। हालांकि, उनके भीतर कुछ अलग करने और अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा भी थी। इसी दौरान, अपने भाई स
16 अग॰


संभावनाओं से अवसर तक: माउंटेन कलेक्टिव की कहानी
“मैं काम की तलाश में पहाड़ों को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। मैं यहीं, अपनी कला के ज़रिए, अपने जैसे दूसरे लोगों के लिए कुछ बनाना चाहती थी।” नैनीताल के पेओरा गाँव की हर्षिता को बचपन में ही कला से प्यार हो गया था। यह प्रेरणा उन्हें अपनी चचेरी बहन से मिली, जो एक कला-शिक्षिका थीं। हर्षिता चुपके से उनके कमरे में जाकर उनके काम को देखती थीं। डाँट पड़ने के बावजूद, वही पल उनके सपनों की शुरुआत बन गया। स्कूल में हर्षिता हर क्रिएटिव काम के लिए सबकी पसंद थी। लेकिन परिवार और समाज के दबाव में
6 अप्रैल


देहरादून की मशरूम लेडी – दिव्या रावत
उखीमठ के कंदारा गाँव की दिव्या रावत, जिन्हें देहरादून में 'मशरूम लेडी' कहा जाता है, की कहानी प्रेरणादायक है। उन्होंने मशरूम की खेती के नए तरीके अपनाए और इस क्षेत्र में बदलाव लाया। कम उम्र में ही उन्होंने यह खेती शुरू की और अब उत्तराखंड में रोजगार के नए अवसर बना रही हैं। दिव्या, स्वर्गीय तेज सिंह रावत की बेटी, ने अपनी स्कूली पढ़ाई देहरादून में की और फिर दिल्ली की एमिटी यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में मास्टर्स की डिग्री ली। उन्होंने NGO 'शक्ति वाहिनी' में काम किया, जहाँ उन्हें महस
28 मार्च
bottom of page
