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संभावनाओं से अवसर तक: माउंटेन कलेक्टिव की कहानी
“मैं काम की तलाश में पहाड़ों को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। मैं यहीं, अपनी कला के ज़रिए, अपने जैसे दूसरे लोगों के लिए कुछ बनाना चाहती थी।” नैनीताल के पेओरा गाँव की हर्षिता को बचपन में ही कला से प्यार हो गया था। यह प्रेरणा उन्हें अपनी चचेरी बहन से मिली, जो एक कला-शिक्षिका थीं। हर्षिता चुपके से उनके कमरे में जाकर उनके काम को देखती थीं। डाँट पड़ने के बावजूद, वही पल उनके सपनों की शुरुआत बन गया। स्कूल में हर्षिता हर क्रिएटिव काम के लिए सबकी पसंद थी। लेकिन परिवार और समाज के दबाव में
6 अप्रैल


देहरादून की मशरूम लेडी – दिव्या रावत
उखीमठ के कंदारा गाँव की दिव्या रावत, जिन्हें देहरादून में 'मशरूम लेडी' कहा जाता है, की कहानी प्रेरणादायक है। उन्होंने मशरूम की खेती के नए तरीके अपनाए और इस क्षेत्र में बदलाव लाया। कम उम्र में ही उन्होंने यह खेती शुरू की और अब उत्तराखंड में रोजगार के नए अवसर बना रही हैं। दिव्या, स्वर्गीय तेज सिंह रावत की बेटी, ने अपनी स्कूली पढ़ाई देहरादून में की और फिर दिल्ली की एमिटी यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में मास्टर्स की डिग्री ली। उन्होंने NGO 'शक्ति वाहिनी' में काम किया, जहाँ उन्हें महस
28 मार्च


Et Aevum का शहद का व्यवसाय
आशीष को नौकरी की सुरक्षा का समाधान अपने ही घर में मिल गया। “शुरुआत मजबूरी में हुई थी, लेकिन अब इसमें मज़ा आने लगा है।”यहीं से आशीष की कहानी शुरू होती है। उन्होंने 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को गणित और भौतिकी पढ़ाकर अपने सफ़र की शुरुआत की थी। आज वे अपने गृह नगर टनकपुर (जिला चंपावत, उत्तराखंड) से एक टिकाऊ शहद का कारोबार चला रहे हैं। आशीष अपने घर के बने शहद के जारों के साथ आशीष के नए वेंचर की प्रेरणा उनका अपना गृहनगर है। वे ऐसे माहौल में बड़े हुए हैं जहाँ लोग पीढ़ियों से मधुमक्
28 मार्च
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