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पिथौरागढ़ के एक उद्यम की कहानी: देवभूमि फ़ूड एंड पैकेजिंग कंपनी
सोहन पापड़ी, गजक या गुड़ पट्टी जैसी पैकेट वाली चीज़ें हम अक्सर बड़ी कंपनियों से खरीदते आए हैं—यही हमारी आदत बन गई है। लेकिन सोचिए, अगर कोई भरोसेमंद लोकल कंपनी इन्हें अच्छी क्वालिटी में बनाए, तो क्या यह और भी बेहतर नहीं होगा? इस तरह देवभूमि फ़ूड एंड पैकेजिंग कंपनी ने पिथौरागढ़ में अपना काम शुरू किया।पिथौरागढ़, जो उत्तराखंड का एक छोटा-सा शहर है, वहाँ पहले कोई स्थानीय फ़ूड बनाने वाली कंपनी नहीं थी। लोग पैकेट वाला खाना तो खरीदते और बेचते थे, लेकिन उसे यहीं कोई बनाता नहीं था। देवभ
28 मार्च


अकल्पनीय को साकार करना – सीमा प्रसाद की कहानी
जलवायु परिवर्तन एक हकीकत है। प्लास्टिक का इस्तेमाल भी अनिवार्य सा लगता है, लेकिन क्या हो अगर इसका कोई समाधान हो? मैसूर (कर्नाटक) की सीमा प्रसाद ने प्लास्टिक का एक अनोखा और आसान विकल्प ढूंढा है—लौकी। वह लौकी के मोटे छिलके से रोज़मर्रा की कई उपयोगी चीज़ें बनाती हैं, जैसे कंटेनर, बर्तन, फूलदान, पेन स्टैंड और लैंपशेड। साल 2017 में उन्होंने अपने पति कृष्ण प्रसाद के साथ मिलकर ‘कृष्णकला’ की शुरुआत की। इसके जरिए वे महिलाओं, बच्चों, कारीगरों और किसानों को सिखाती हैं कि कैसे लौकी से सु
27 मार्च


सूरज कुमार – देहरादून के युवा उद्यमी
“बड़े सपने देखो,” उत्तराखंड के सूरज कुमार कहते हैं, जो देहरादून स्थित स्वतंत्र साप्ताहिक पत्रिका ‘द देहरादून स्ट्रीट’ के संस्थापक हैं। कई युवा लेखक अपनी कहानियाँ और रचनाएँ दुनिया तक पहुँचाना चाहते हैं, लेकिन सही मंच और अवसरों की जानकारी मिलना आसान नहीं होता। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए ‘द देहरादून स्ट्रीट’ एक नई पहल के रूप में सामने आया। सूरज ने 15 सितंबर 2015 को इसे एक सपने की तरह शुरू किया था, जो आज हकीकत बन चुका है। यह प्लेटफॉर्म देहरादून और उत्तराखंड के युवाओं को अपने
27 मार्च
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