पिथौरागढ़ के एक उद्यम की कहानी: देवभूमि फ़ूड एंड पैकेजिंग कंपनी
- 28 मार्च
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सोहन पापड़ी, गजक या गुड़ पट्टी जैसी पैकेट वाली चीज़ें हम अक्सर बड़ी कंपनियों से खरीदते आए हैं—यही हमारी आदत बन गई है।
लेकिन सोचिए, अगर कोई भरोसेमंद लोकल कंपनी इन्हें अच्छी क्वालिटी में बनाए, तो क्या यह और भी बेहतर नहीं होगा?
इस तरह देवभूमि फ़ूड एंड पैकेजिंग कंपनी ने पिथौरागढ़ में अपना काम शुरू किया।पिथौरागढ़, जो उत्तराखंड का एक छोटा-सा शहर है, वहाँ पहले कोई स्थानीय फ़ूड बनाने वाली कंपनी नहीं थी। लोग पैकेट वाला खाना तो खरीदते और बेचते थे, लेकिन उसे यहीं कोई बनाता नहीं था।
देवभूमि यहाँ की पहली स्थानीय फ़ूड प्रोड्यूसिंग कंपनी बनी और जल्दी ही लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई।
सोहन पापड़ी से लेकर गजक तक बेचने वाला देवभूमि अपने ग्राहकों की ज़रूरतों को अच्छी तरह समझता है। वे मडुआ, मक्का और बेसन जैसी स्थानीय चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे किसानों को फायदा होता है।
साथ ही, देवभूमि स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोज़गार के मौके भी बना रहा है। खासकर पहाड़ों की महिलाओं के लिए यह प्रेरणादायक है, क्योंकि अब वे अतिरिक्त कमाई कर पा रही हैं।
किसानों और महिलाओं की आय बढ़ाकर देवभूमि एक सफल स्थानीय कृषि-उद्यम का उदाहरण बन गया है। इसके साथ ही, वे काम का सही बँटवारा और स्थानीय नेतृत्व को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

देवभूमि की यात्रा अचानक शुरू नहीं हुई। शुरुआत से पहले उन्होंने हल्दीराम का अच्छा-खासा अध्ययन किया और उनके बिज़नेस मॉडल को समझा।
वे अपने प्रोडक्ट्स में क्वालिटी और न्यूट्रिशन पर खास ध्यान देते हैं। उनका फोकस ऑर्गेनिक तरीके से चीजें बनाना और बाजरा जैसे लोकल इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल करना है।
उन्होंने अपना मॉडल इस तरह बनाया है कि वह लोकल लोगों की ज़रूरतों को पूरा कर सके। लोकल प्रोडक्ट्स पर लोगों का भरोसा भी ज़्यादा होता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि ये सेहत के लिए बेहतर होते हैं—जैसे इनमें कैल्शियम ज़्यादा और कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
देवभूमि अपने ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के ज़रिए अच्छे स्वास्थ्य का भरोसा देता है। इसी वजह से यह जल्दी ही लोकल लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया।
रोज़गार बढ़ाने और लोगों को जोड़ने के लिए यह एंटरप्रेन्योरशिप मॉडल एक बेहतरीन और प्रेरणादायक उदाहरण है।





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