देहरादून की मशरूम लेडी – दिव्या रावत
- 28 मार्च
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उखीमठ के कंदारा गाँव की दिव्या रावत, जिन्हें देहरादून में 'मशरूम लेडी' कहा जाता है, की कहानी प्रेरणादायक है। उन्होंने मशरूम की खेती के नए तरीके अपनाए और इस क्षेत्र में बदलाव लाया। कम उम्र में ही उन्होंने यह खेती शुरू की और अब उत्तराखंड में रोजगार के नए अवसर बना रही हैं।
दिव्या, स्वर्गीय तेज सिंह रावत की बेटी, ने अपनी स्कूली पढ़ाई देहरादून में की और फिर दिल्ली की एमिटी यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में मास्टर्स की डिग्री ली। उन्होंने NGO 'शक्ति वाहिनी' में काम किया, जहाँ उन्हें महसूस हुआ कि उनके गृह-प्रदेश उत्तराखंड के युवाओं के पास न सिर्फ़ अवसरों की कमी है, बल्कि ज़रूरी कौशल भी नहीं हैं, जिससे उन्हें रोजगार के विकल्प नहीं मिल पाते। इसके बाद वह उत्तराखंड लौट आईं और 2012 में सोलन के 'मशरूम अनुसंधान निदेशालय' में एक उद्यमिता कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ उन्होंने मशरूम क्षेत्र के कई वैज्ञानिकों से मुलाकात की।

दिव्या ने सिर्फ़ 100 मशरूम से शुरुआत की और लगातार आगे बढ़ती रहीं। उन्होंने 35–40 डिग्री तापमान में मशरूम उगाकर भारत में इस खेती को बढ़ावा दिया। दिव्या ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है, "युवाओं को अपने आराम क्षेत्र से बाहर निकलकर नया और चुनौतीपूर्ण काम करना चाहिए, तभी वे बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं।"
दिव्या ने उत्तराखंड के हर घर तक मशरूम की खेती पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। वह कहती हैं, "मशरूम घर में ही उगाया जा सकता है, इसके लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं। हम अपने एक-दो कमरों में आसानी से मशरूम उगा सकते हैं।" उनका घर रिसर्च और ज्ञान दोनों का केंद्र है।
दिव्या ‘सौम्या फूड्स प्राइवेट लिमिटेड’ चलाती हैं। वह महिलाओं और युवाओं को रोजगार देती हैं। 2013 की उत्तराखंड बाढ़ के दौरान उन्होंने लोगों को खेती के टिकाऊ तरीके अपनाने और महिलाओं को अपनी आजीविका बनाने के लिए मदद की। उनके इस काम के लिए उन्हें उत्तराखंड की ब्रांड एंबेसडर और ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जो भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिया।




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