संभावनाओं से अवसर तक: माउंटेन कलेक्टिव की कहानी
- 6 अप्रैल
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“मैं काम की तलाश में पहाड़ों को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी। मैं यहीं, अपनी कला के ज़रिए, अपने जैसे दूसरे लोगों के लिए कुछ बनाना चाहती थी।”
नैनीताल के पेओरा गाँव की हर्षिता को बचपन में ही कला से प्यार हो गया था। यह प्रेरणा उन्हें अपनी चचेरी बहन से मिली, जो एक कला-शिक्षिका थीं। हर्षिता चुपके से उनके कमरे में जाकर उनके काम को देखती थीं। डाँट पड़ने के बावजूद, वही पल उनके सपनों की शुरुआत बन गया।
स्कूल में हर्षिता हर क्रिएटिव काम के लिए सबकी पसंद थी। लेकिन परिवार और समाज के दबाव में उसने साइंस चुना। बाद में उसने ग्रेजुएशन में फाइन आर्ट्स लेने का फैसला किया। शुरू में माता-पिता ने विरोध किया, लेकिन परिवार के सहयोग से मान गए। पढ़ाई के दौरान उसने अपनी आर्ट बेचने का सोचा, पर शुरुआत कैसे करें, यह समझ नहीं आया।
2023 में, उन्होंने ‘Business ki Udaan’ वर्कशॉप में हिस्सा लिया, जिसे Margshala और Aarohi ने मिलकर आयोजित किया था। इसका उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देना था।
वह कहती हैं, “पहली बार लगा कि मैं किसी से पीछे नहीं हूँ। मैं भी आगे बढ़ सकती हूँ।”
इस वर्कशॉप ने उन्हें अपनी कला को एक व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास और स्पष्टता दी।
इसी दौरान उनकी मुलाक़ात नीरज और पंकज से हुई, जो पहले उनके जैसे सीखने वाले साथी थे और बाद में भरोसेमंद सलाहकार बन गए। साथ मिलकर उन्होंने अपने उद्यम का नाम ‘कुमाऊँनी चित्रकला संग्रह’ रखा—जो कुमाऊँ, कला और सामूहिकता का मेल है। वे कहती हैं, यह उन लोगों के लिए एक जगह है जो अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं। ‘Business ki Udaan’ में बने दोस्त अब उनके सफ़र का अहम हिस्सा हैं।
हर्षिता ने अपने बचाए ₹5,000 से स्थानीय NGO ‘आरोही’ के ‘हिमालयन हाट’ में स्टॉल लगाकर अपने आइडिया को आज़माया। उसने 10 दिनों में अलग-अलग कीमत (₹10–₹500) के प्रोडक्ट बनाए। सिर्फ 3 दिनों में सारा सामान बिक गया और उसे 5 गुना मुनाफा हुआ। इससे उसका आइडिया सफल साबित हुआ, लेकिन आगे बढ़ने के लिए उसे और कलाकारों और बिज़नेस स्किल्स की जरूरत महसूस हुई।

बाद में, हर्षिता ने शुरुआती उद्यमियों के लिए मार्गशाला के ‘स्वरोज़गार फेलोशिप प्रोग्राम’ में भाग लिया। 9 महीनों में उन्होंने अपने उद्यमिता कौशल को बेहतर बनाया और नेटवर्किंग, मूल्य निर्धारण व विज़न पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
आज कुमाऊँनी चित्रकला संग्रह स्वतंत्र कलाकारों को मंच देता है और काम जारी रखने के लिए 25% कमीशन लेता है। हर्षिता ‘सीखो और कमाओ’ मॉडल भी चला रही हैं, जहाँ युवा कलाकार सीखते भी हैं और कमाते भी। अब उन्हें अपने आत्मविश्वास और आवाज़ की ताकत का एहसास है, और वे चाहती हैं कि दूसरे युवा भी बिना घर छोड़े अपनी पहचान बना सकें।
वह आगे कहती हैं, “मैंने अभी तक अपने माता-पिता को अपने इस काम के बारे में नहीं बताया है; उन्हें लगता है कि मास्टर्स की पढ़ाई पूरी होते ही मुझे कोई नौकरी मिल जाएगी। मुझे अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा है और मैं उन्हें यह दिखाना चाहती हूँ कि यह भी रोज़ी-रोटी कमाने का एक ज़रिया हो सकता है। उन्होंने मुझे और मेरी बहन को पढ़ाने-लिखाने के लिए बहुत मेहनत की है, और मैं उनके उस बोझ को हल्का करना चाहती हूँ। जब सही समय आएगा, तब मैं उन्हें इस बारे में बता दूँगी।”

ऋजुता दत्त द्वारा लिखित




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