महामारी के बीच सपनों को साकार करने की कोशिश: किशोर की कहानी
- 28 मार्च
- 2 मिनट पठन
हम ‘मार्गशाला’ के पूर्व छात्रों की प्रेरणादायक कहानियाँ साझा कर रहे हैं, ताकि लोग समझ सकें कि सपने सच में ज़िंदगी बदल सकते हैं—चाहे हम कहीं से भी हों।आज की कहानी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के किशोर की है।
एक उभरते हुए उद्यमी किशोर की शुरुआत में सेना में जाने की इच्छा थी, जैसा कि उत्तराखंड के कई युवाओं में आम बात है। इस क्षेत्र के अधिकतर युवा सेना को अपने करियर के रूप में चुनना चाहते हैं, जो उन्हें देश के अन्य हिस्सों के युवाओं से अलग बनाता है।
किशोर ने भी इसी प्रेरणा से डिफ़ेंस की परीक्षा दी। वह फ़िटनेस टेस्ट में पास हो गए, लेकिन लिखित परीक्षा में सफल नहीं हो सके। इस पर किशोर कहते हैं, "मुझे पढ़ाई में ज़्यादा रुचि नहीं थी।"
लेकिन उसकी कहानी अभी शुरू ही हुई थी। किशोर ने कंप्यूटर की ट्रेनिंग ली और कौशल विकास के क्षेत्र में सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दी। वह परीक्षा पास कर गया और साल 2015 में नौकरी जॉइन कर ली।
किशोर ने बताया, “इस नौकरी की सैलरी ज्यादा नहीं थी, इसलिए जब भी समय मिलता, मैं ट्रेकिंग पर चला जाता था।”

वह दूसरे राज्यों से आने वाले टूरिस्ट ग्रुप्स के साथ ट्रेकिंग पर जाता था। वह और उसके दोस्त उन्हें रास्ता दिखाते, उनका सामान उठाने में मदद करते और आसपास की जगहें घुमाते थे।
उसके पास कोई आधिकारिक टूरिस्ट एजेंसी नहीं थी, बल्कि वह अपने जान-पहचान के जरिए ही टूरिस्ट ग्रुप्स से जुड़ता था।
नई-नई जगहों को खोजते हुए वह और उसके दोस्त इन ट्रेक्स से अपनी पॉकेट मनी भी कमाते थे।
इसी तरह किशोर के ट्रेकिंग वेंचर की शुरुआत हुई।
चूँकि वह अपनी स्किल एकेडमी की नौकरी भी कर रहा था, इसलिए किशोर के लिए यह समय काफी मेहनत भरा था। उसने दोनों कामों में संतुलन बनाकर अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाईं, लेकिन कोविड के आने से सब कुछ बदल गया।
महामारी के दौरान बहुत से लोगों की तरह किशोर की नौकरी भी चली गई, क्योंकि वह कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे थे। उनकी बचत धीरे-धीरे खत्म होने लगी और पहाड़ों में जीवन और कठिन हो गया।
इसी समय उन्होंने ‘मार्गशाला’ से जुड़ने का निर्णय लिया। उनके लिए मार्गशाला एक तरह का जीवन मार्गदर्शन बन गई।
किशोर कहते हैं कि यह सिर्फ़ मेंटरिंग तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें यहाँ से नई उम्मीद मिली। उन्हें सबसे अच्छी बात यह लगी कि प्रोग्राम खत्म होने के बाद भी लोग उनके साथ जुड़े रहे।

जब 'मार्गशाला' चल रही थी, तब किशोर ने अपने जुनून और मेंटर्स की प्रेरणा से ट्रेकिंग का काम शुरू किया।
लॉकडाउन ने जिंदगी को जरूर बदला, लेकिन उनके सपनों को नहीं रोक सका।
अब किशोर टूरिस्ट ट्रिप के लिए गाड़ी किराए पर भी देते हैं। उनके उद्यमी सोच ने उन्हें आगे बढ़ने और अपने काम को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।
उनकी कहानी दिखाती है कि पहाड़ों में रहने वाले युवाओं के सपने भी सच हो सकते हैं।
अगर किशोर की कहानी आपको प्रेरित करती है, तो आज ही Margshala से जुड़ें और अपना उद्यम शुरू करें!
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